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26/7/07

मेरा कुत्ता

मेरा कुत्ता नेता हो गया है
लोगों का चहेता हो गया है
जहाँ भी जाये
जुगत भिड़ा लेता है
भाषण देने लगे
तो जमा देता है
कुत्ता मेरा है --
पर काम आपके भी आ सकता है
मसलन मनचाही जगह
आपकी ट्रांसफर करा सकता है
या पड़ोसियों को
झूठे मुकदमे में फँसा सकता है
आप कहेंगे
फाँक रहा है
इसका कुत्ता है न
इसीलिये हाँक रहा है
मगर झूठी बात नहीं करता हूँ
ऐसा इसीलिए कहता हूँ
क्योंकि पहले मेरा कुत्ता
खाना खाने के बाद
पाँच घंटे के लिए गायब हो जाता था
फिर वह पाँच पाँच हफ़्‍ते पर आने लगा
और कुछ दिनों बाद तो
पाँच महीने पर आकर खाने लगा
और अब तो बिल्कुल गजब ढाता है
खाना खाने के बाद
पाँच साल के लिए गायब हो जाता है
बीच में एक बार भी नहीं आता है
इसीलिए तो कहता हूँ
मेरा कुत्ता नेता हो गया है
लोगों का चहेता हो गया है

नेता और वसीयत

एक पागल कुत्ते ने


एक कठोर दिल नेता के


मुलायम पृष्ठ भाग को नोचा


तो नेता तो अब जरूर मर जायेगा


ऐसा लोगों ने सोंचा


लोग देखने के लिए गये कि


कुत्ता काटा नेता कैसा दिख रहा है


पर अरे ये क्या


नेता तो आराम से कुर्सी पर बैठा


कागज कलम लिए कुछ लिख रहा है


लोगों ने कहा- नेताजी


क्या वसीयत लिख रहे हो


नेता बोला- वसीयत लिख कर वसीयत क्या मैं चाटूंगा


अरे मैं तो लिस्ट बना रहा हूँ


कि कल सुबह किनको किनको काटूँगा.

19/7/07

सौ साल पहले मैं कर्जदार था

आपने कभी उधार लिया है. या ऐसे भी पूछा जा सकता है कि आपको कभी किसी ने उधार दिया है. उधारी के बडे किस्से हैं एक आदमी ने ट्रेन में किसी अंजान यात्री से उधार मांगा. अंजान आदमी बोला- आप मुझसे उधार कैसे मांग रहे है मैं तो आपको जानता नहीं, बन्दा बोला- इसी लिए तो आपसे मांग रहा हूँ.जो जानते हैं वो तो देते नहीं है. ऐसे ही एक स्कूल में शिक्षक ने गणित की क्लास में एक लडके से पूछा- मान लो मैने तुम्हारे पिताजी को 1200 रूपये पन्द्रह प्रतिशत ब्याज पर 6 महीने के लिए उधार दिया तो 6 महीने बाद तुम्हारे पिता जी कितना पैसा लौटायेंगे? लड़का बोला- तुम इतना सा गणित भी नहीं जानते. ळडका बोला – मैं गणित बहुत अच्छी तरह जानता हूँ . मगर आप मेरे बाप को नहीं जानते. किसी का लौटाया है जो आपका लौटायेंगे. तो उधार मांगना एक कला है. अगर आपको उधार मिल जाये तो आप सही कलाकार हैं. लेकर कभी न लौटायें तो आप सुपर हिट है. चलिए एक पैरोडी लिजिए. अगर आप बाथरूम टाइप के सिंगर है और इसे गाना चाहते हैं तो मुझे खुशी होगी. अगर रिकार्ड निकलवाना चाहे तो मुझे सूचित करें. पैरोडी मैंने इस तरह लिखी है.
सौ साल पहले मैं कर्जदार था, 2
आज भी हूँ और कल भी रहूंगा
माँ बाप बीवी बच्चों के
सिर का मैं भार था 2
आज भी हू और कल भी रहूंगा. उधार जब कोई मिल जाये
मेरी तबीयत खिल जाती है जब वापस करना हो तो
मेरी नानी मर जाती है
देने वालो का हरदम करता इंतजार था 2
आज भी हू और कल भी करूंगा सौ साल पहले...........
एक वार जो देते फिर
ता उम्र वे रोते हैं
वे जागा करते रातों को
हम चैन से सोते है.
मैं तो पैदाएशी ऐसा होशियार था 2
आज भी हूँ और कल भी रहूंगा
सौ साल पहले...........
इस घर में टी वी ,फ्रीज
और सोफा उधार से है हर हसीन जलवा
और मस्त बहार उधार से है उधार से ही लेने की
सौचता हर बार था 2 आज भी हूँ और कल भी रहूंगा
सौ साल पहले मैं कर्जदार था,

किस्सा अमिताभ बच्चन , रेखा और एक बकरी का

आप कलेक्टर हैं, आपके पिताजी कलेक्टर है या कि आप स्वय कलेक्टर साहब के पिताजी है इससे कोइ फर्क नहीं पड़ता. आप जरूर बहुत बडे तोप होंगे . पर निश्चित रूप से अपने बाथ रूम के अन्दर होंगे . आप जो भी तोप , तमंचा या तलवार हो किंतु अगर आप हिन्दी फिल्मों से वाकिफ हैं तो फिल्म सितारों के प्रति लोगों की दीवानगी से नावाकिफ नहीं होंगे.
एक बूढ़े कलेक्टर साहब मिले. मुँह के दाँत गिर चुके हैं. सेवा से रिटायर्ड हैं और अब पुराने दिनों की यादो की जुगाली करते हुए दिन बिताते है. गर्मी की छुट्टियों में गांव गया था तो उनसे मुलाकात हुई. एक दूसरे से मिलकर हम दोनों अति प्रसन्न हुए. फिल्म, साहित्य और कुल मिलाकर जिंदगी के अनेकानेक पहलुओ पर कई दिनों चर्चा चली. एक दिन उन्होंने एक घटना का जिक्र किया. बोले उमराव जान की शूटिंग लखनऊ में हुई थी. और जब शूटिंग हो रही थी वे तब वहाँ के जिला मजिस्ट्रेट थे. रेखा को उन्होने तब वही साक्षात देखा था और तब से अब तक वह उनकी आँखों के आगे गाहे बगाहे वही बोल बोल कर फुर्र हो जाती है कि दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए बस एक बार मेरा कहा मान लीजिए . वे शूटिंग के लिए वहाँ लखनऊ आयी थी. उन्होने रेखा के बहुत अनुरोध करने पर उसके साथ अपना एक फोटो भी अपने निजी कैमरे से निकलवाया था ताकि सनद रहे. और जब कैमरा कलेक्टर साहब का अपना था तो जाहिर है फोटोग्राफर भी उनका अपना ही रहा होगा. तो फोटो निकाली साहब के एक परम प्रिय चपरासी ने. जब फोटो साफ कराया गया तो चपरासी की फोटोग्राफी की प्रतिभा और कैमरे की विलक्षण क्वालिटी का पता चला. फोटो में न रेखा थी न कलेक्टर साहब थे. था तो बस आधे फ़ोटो में जमीन थी और आधे में आसमान था. इस तरह शेर गलत साबित हो रहा था कि
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कभी जमीं मिलती है तो आसमां नहीं मिलता
इस तस्वीर में मुकम्मल जहां था , जमीन भी थी और आसमान भी था. बस नहीं था तो कलेक्टर साहब नहीं थे और रेखा नहीं थी. वह तस्वीर उन्होंने बड़े जतन से संभाल कर अपने अलबम में रखी हुई है जिसे देख कर हम भी धन्य हो गए.
मान लीजिए , क्योंकि मानने के अलावा और कोइ उपाय नहीं है. आप आज अमिताभ बच्चन से मिलें उनके साथ एक तस्वीर निकलवाने का सौभाग्य भी आपको प्राप्त हुआ. या तस्वीर भी छोडिये आपने अमिताभ बच्चन का साक्षात दर्शन किया. तो आप जिस दिन मृत्यु शय्या पर भी होंगे और चर्चा चलेगी तो आप झट उठ कर कहेंगे कि आपने अमिताभ बच्चन को करीब से देखा है और उनके साथ आपका फोटो भी है. अपने बेटे , पोते , पोतियों , नातियों , सब को जब जब आपको मौका मिलेगा बतायेंगे कि उनके साथ आपकी तस्वीर है .
मैने मुम्बई के एक फर्निचर शाँप में आमिर खान को देखा. लडकियाँ आस पास मडरा रही थी और लडके और बूढे लडकियों के आस पास मडरा रहे थे. तभी एक मुसलिम लड़की ने आमिर को देखा और देखते ही चिल्लायी – आ..........मिर भा..........ई........फिर चिल्लाती हुई उससे लिपटने के लिए उसकी और दौडती हुई भागी. मगर हाय रे किस्मत और हाय रे किस्मत की मार ! बेरहम सिक्यूरिटी वालों ने इस बिछडी हुई बहन को अपनी मंजिल तक पहुँचने से पहले ही रोक लिया. हालांकि बहन जी अपनी प्रूरी ताकत के साथ सिक्यूरिटी वालों से जूझ रही थी और लगातार आमिर भाई आमिर भाई चिल्लाये जा रही थी. शायद इसी का असर हुआ कि किसी तरह आमिर ने खुद आगे बढ़ कर उससे हाथ मिलाया और हाथ भी क्या मिलाया दोनो की दो- दो उंगलियां 1/10 सेंकेंड के लिए एक दूसरे को छू गयी होगी . और इतने में ही दोनों वहां मौजूद सिक्यूरिटी वालों की मदद से सदा के लिए जुदा हो गये. पांच फीट की लड़की फर्निचर शाप से बाहर निकली तो छे छे फिट ऊपर उछल रही थी. बल्कि लोगों ने देखा कि लड़की के पाँव आधे घंटे के लिए, जब तक वह वहाँ रही, जमीन पर पड़े ही नहीं.
लेकिन हम ठहरे निपट गाँव के आदमी. हमारे दादा जी जो अब नहीं रहे ने कभी कोई फिल्म नहीं देखी थी . वे अमिताभ बच्चन या रेखा को भी नहीं जानते थे. पिछले साल हम गाँव गये तो अपना डिजिटल कैमरा लेकर गये थे. लोगों की खूब तस्वीरे उतारी क्योंकि कोई खर्चा तो होना नहीं था. गाँव का फील देने के लिए कुछ लोगों से उन्हें अपने कन्धे पर आस पास बेवजह मिमिया रही बकरियो को उठा लेने को कहा. तस्वीरें अच्छी आयी. कुछ दिनों बाद फिर गाँव गये तो लोगों ने कहा कि हमारी भी एक तस्वीर बकरी के साथ निकालो. गाँव भर से बकरियाँ खोज खोज कर लायी गयी और हमने कई बकरियों और बच्चों की तस्वीरें निकाली. मेरी पाँच साल की बेटी गाँव से वापस मुम्बई के लिए चली तो खूब रोई. बोली एक बकरी साथ ले चलो. खैर बकरी तो नहीं ला पाये. पर ये यादे साथ आ गयी
तो कुल मिला कर कहने का मतलब ये था कि आज भी हमारे गाँव के बच्चो और बूढों के लिए एक बकरी अमिताभ बच्चन और रेखा से बढ़कर है क्योंकि उन्हें वे कन्धे पर बिठा सकते है, गोद में ले सकते है. बकरी उन्हें दूध भी देती है. आखिर गांधी जी ही तो इसी बकरी के दूध को हजार नियामत से बढाकर मानते थे . ये फिल्म स्टार तो उन्हें सुनहरे सपनों के सिवा कुछ दे नहीं पाते. चलिए चलते चलते वह शेर सुन लीजिए जो गांव की ही एक बकरी ने बड़ी मासूमियत के साथ मेरे कान में सुनाया था.

आप मेरा कत्ल करेंगे इसकी तो उम्मीद थी
पर उस दिन क्यों किया जिस दिन बकरीद थी.

17/7/07

एक मोटी की लव स्टोरी

हिरोइन परेशान थी. वह मोटी हो गयी थी और होती ही चली जा रही थी. पता नहीं पब्लिक मोटी हिरोइन को पसन्द करेगी या नहीं. पर पब्लिक तो बाद में. मालूम नहीं डायरेक्टर , प्रोड्यूशर भी पसन्द करें या नहीं. तभी सिग्नल पर हिरोइन को डायरेक्टर दिखा. डायरेक्टर भी काफी परेशान चल रहा था. फ्लाँप फिल्मो का उसका रिकार्ड कुछ ज्यादा ही लम्बा होता जा रहा था. कोई फायनेंसर उस पर निगाह डालने को तैयार न था और अंडर वर्ल्ड के पजामे के अन्दर तक अभी उसकी टाँग पहुंच नहीं पायी थी. ऐसे में हिरोइन की निगाह उस पर पड़ी तो उसकी आत्मा हरी हो गई. चूँकि अभी शाम नहीं ढली थी और रात का नशा पूरी तरह उतरा नहीं था इसलिए दोनों ने तय किया कि डिस्कसशन के लिए काँफी टेबल ज्यादा उपयुक्त रहेगा. दोनों ही बार को पार कर कैफे में घुसे . हिरोइन ने बैरे के आने से पहले अपनी फिक्र जाहिर की कि वह न चाहते हुए भी मोटी हुई जा रही है. डायरेक्टर बोला वह न चाहते हुए भी फ्लाँप पर फ्लाँप फिल्मे दिये जा रहा है. दोनों ने सोचा कुछ करना चाहिए और जब करना ही है तो क्यों न एक दूजे के लिए करे. डायरेक्टर बोला- मैं तुझे साईन करना चाहता हूँ..
हिरोइन मन ही मन खुश हुई पर उपर उपर बोली- मुझ मोटी को? डायरेक्टर बोला- हाँ . फिल्म का नाम है एक मोटी की लव स्टोरी. हिरोइन खुश हो गई तो डायरेक्टर ने उसकी खुशी कम करते हुए कहा- पर फायनेंस है नहीं इसलिए मैं कुछ दे नहीं पाउंगा. हिरोइन बोली- हम फ्रेंड है. तो फ्रेंड किस दिन काम आते हैं? मैं तुम्हारे बुरे वक्त में कुछ हेल्प करना चाहूँ तो ये तो मेरा हक बनता है. डायरेक्टर ने आँखों में शरारत भरते हुए पूछा- पूछोगी नहीं इस्टोरी क्या है.
हिरोइन बोली- आप भी मजाक करते हैं. पिछली बार इस्टोरी पूछी थी तो आपने मुझे फिल्म से ही आउट कर दिया था. डायरेक्टर खुश होते हुए बोला- गुड! तुम्हारा एप्रोच बिल्कुल प्रोफेशनल हो गया है.
वैसे मुझे भी मालूम नही कि कहानी क्या होगी. हो सकता है मैं किसी फाँरेन फिल्म से इस्टोरी लूंगा. काँफी की चुस्की लेते हुए डायरेक्टर ने बात आगे बढाई- इस्टोरी चूँकि है नहीं इसलिए तय है कि फिल्म में कुछ सीन नमकीन होंगे. कोई एतराज तो नहीं? हिरोइन बोली- सर पिछली बार एतराज किय था तो आपने मेरा रोल काटकर पाँच मिनिट का कर दिया था. मैं क्या पागल हूँ?( आखिरी वाक्य हिरोइन ने इस अन्दाज में कहा जैसे वह सचमुच पागल नहीं हो) हिरोइन ने सवाल क्या- हीरो कौन होगा? डायरेक्टर बोला- एक तो तू वैसे ही मोटी हो गई हो. दूसरे मेरे पास फायनेंस भी नहीं है. कोई हीरो राज़ी नहीं होगा. तो क्या बिना हीरो के फिल्म बनाओगे? मैं सोंचता हूँ अपने बडे बेटे को हीरो बना दूँ मगर बड़ा बेटा तो अभी बहुत छोटा है और बोतल से दूध पीता है. क्या तुम मुझे माँ का रोल दे रहे हो? डायरेक्टर बोला- नहीं वह तुम्हारे ब्वाय फ्रेंड का रोल करेगा. हम कम्प्यूटर की मदद से उसका डांस वगैरह दिखा देंगे. हिरोइन बोली- मगर बडी- बडी मल्टीस्टारर फिल्मे फ्लाँप हो रही है. एक मोटी हिरोइन और छोटे हीरो से फिल्म का क्या होगा? डायरेक्टर बोल- तुम चिंता मत करो. हमें प्लान करना पडेगा हिरोइन पूरे अटेंशन के साथ आगे झुक गाई तो डायरेक्टर बोली- फिल्म रीलीज होने से पहले तुम कानून का दरवाजा खटखटाओगी कि इस फिल्म मैं तुम जिंतनी मोटी नहीं हो उससे ज्यादा दिखाई गई हो. इतनी मोटी देखकर तुम्हारे फैन तुमसे नाराज हो जायेगे. वैसे ये अलग बात है कि तुम्हें ज्यादा मोटी देख कर तुम्हारे फैन और खुश होंगे. खबर की भूखी प्यासी मिडिया इस खबर लो ले उडेगी. हो सके और थियेटर मालिक राजी हो तो एक- आध जगह हम तुम्हारे फैन से थियेटर पर तोड फोड भी करा देंगे. फिर देखना कैसे होती है हमारी पिक्चर सुपर हिट! काँफी खत्म हो चुकी थी इसलिए दोनो मुस्कुराते हुए कैफे से बाहर निकल पडे हास्य व्यंग्य, फिल्म.